दशहरा 2026: तिथि, विजय मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

दशहरा 2026: तिथि, विजय मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

दशहरा 2026: तिथि, विजय मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों के बाद आने वाला यह पर्व भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ मनाया जाता है।

दशहरा दो प्रमुख धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है। पहली, रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम की रावण पर विजय। दूसरी, देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय। इस दिन लोग मंदिरों में पूजा करते हैं, रामलीला देखते हैं और कई स्थानों पर रावण दहन के आयोजन में शामिल होते हैं।

वर्ष 2026 में दिल्ली और उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। हालांकि, बंगाल की विजयादशमी और मैसूर का प्रसिद्ध जम्बू सवारी उत्सव 21 अक्टूबर को आयोजित होगा।

दशहरा 2026: तिथि और विजय मुहूर्त

दशहरा 2026 से जुड़ी मुख्य जानकारी इस प्रकार है:

  • तिथि: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 — दिल्ली में प्रचलित पर्व-तिथि के अनुसार

  • पर्व: विजयादशमी या दशहरा

  • दिल्ली में विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक

  • दशमी तिथि आरंभ: 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे

  • दशमी तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे

  • बंगाल में विजयादशमी: बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

ये समय दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं। पूजा के मुहूर्त में स्थान और परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी विशेष अनुष्ठान की योजना बनाने से पहले स्थानीय पंचांग देखें।

दशहरा क्यों मनाया जाता है?

दशहरा की धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों का मुख्य संदेश अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय है।

1. भगवान श्रीराम की रावण पर विजय

रामायण के अनुसार रावण ने भगवान श्रीराम की पत्नी माता सीता का हरण कर लिया था। माता सीता को वापस लाने के लिए भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण, हनुमान और वानर सेना की सहायता से रावण के विरुद्ध युद्ध किया और अंततः उसे पराजित किया।

दशहरा इसी विजय की स्मृति में मनाया जाता है। उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में रामलीला का आयोजन होता है, जिसमें रामायण की घटनाओं और अंतिम युद्ध का मंचन किया जाता है। इसके बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।

यह कथा धर्म, साहस, जिम्मेदारी और विनम्रता के महत्व की याद दिलाती है।

2. मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय

एक अन्य प्रमुख धार्मिक परंपरा में विजयादशमी को मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से जोड़ा जाता है। मान्यता के अनुसार महिषासुर ने अपनी शक्ति के बल पर देवताओं और संसार में संकट उत्पन्न किया था। देवी दुर्गा ने उसका वध कर धर्म की स्थापना की।

पूर्वी भारत में यह परंपरा विशेष महत्व रखती है। दुर्गा पूजा के कई दिनों के अनुष्ठानों के बाद भक्त मां दुर्गा को विदाई देते हैं और उनकी विजय का उत्सव मनाते हैं।

दोनों परंपराएं विजयादशमी को अच्छाई की विजय का प्रतीक बनाती हैं।

दशहरा पूजा विधि

दशहरा के दिन पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। कई परिवार भगवान श्रीराम, मां दुर्गा या अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा करते हैं।

घर पर सामान्य पूजा के लिए इन चरणों का पालन किया जा सकता है।

पूजा सामग्री

  • देवी या देवता की तस्वीर अथवा प्रतिमा

  • दीपक और घी या तेल

  • फूल

  • रोली या कुमकुम

  • अक्षत यानी साबुत चावल

  • धूप या अगरबत्ती

  • फल और पारंपरिक प्रसाद

  • जल तथा परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य सामग्री

दशहरा पूजा के चरण

1. पूजा स्थान की सफाई करें

पूजा स्थल को साफ करके आवश्यक सामग्री व्यवस्थित करें।

2. दीपक जलाएं

दीपक और धूप जलाकर अपने आराध्य का ध्यान करें।

3. फूल और प्रसाद अर्पित करें

श्रद्धापूर्वक फूल, अक्षत, फल और अपनी परंपरा के अनुसार अन्य सामग्री अर्पित करें।

4. मंत्र या प्रार्थना करें

भगवान श्रीराम, मां दुर्गा या अपने आराध्य से संबंधित प्रार्थना अथवा धार्मिक पाठ करें।

5. आरती करें

पूजा के अंत में आरती करें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें।

यदि आपके परिवार में विजय मुहूर्त, शमी पूजा या अपराजिता पूजा की परंपरा है, तो उसके लिए स्थानीय पंचांग और पारिवारिक रीति का पालन करें।

दशहरा पर विजय मुहूर्त का महत्व

विजय मुहूर्त को विजयादशमी से जुड़ा शुभ समय माना जाता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में इसे कुछ शुभ कार्यों और विशेष पूजा-अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

दिल्ली में 20 अक्टूबर 2026 को विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक बताया गया है।

कुछ भक्त इस अवधि में पूजा, शमी पूजा या अपनी पारिवारिक परंपरा से जुड़े अन्य अनुष्ठान करते हैं। किस कार्य के लिए यह समय उपयुक्त है, यह स्थानीय परंपरा और पंचांग पर निर्भर करता है।

दिल्ली का मुहूर्त पूरे भारत के लिए समान नहीं मानना चाहिए। सूर्योदय और स्थानीय पंचांग की गणना के कारण समय में अंतर हो सकता है।

दशहरा पर शमी पूजा क्या है?

शमी पूजा विजयादशमी से जुड़ी एक पारंपरिक पूजा है, जिसका पालन कुछ हिंदू समुदायों में किया जाता है। शमी वृक्ष को धार्मिक मान्यताओं में शुभता, शक्ति और विजय से जोड़ा जाता है।

कुछ परिवार इस वृक्ष की पूजा करते हैं और शमी के पत्तों को शुभकामना तथा समृद्धि के प्रतीक के रूप में एक-दूसरे को देते हैं। यह परंपरा हर क्षेत्र और परिवार में समान रूप से प्रचलित नहीं है।

अपराजिता पूजा क्या है?

अपराजिता पूजा भी कुछ परंपराओं में विजयादशमी से जुड़ा अनुष्ठान है। अपराजिता का अर्थ है जिसे पराजित न किया जा सके। धार्मिक मान्यताओं में अपराजिता को देवी शक्ति के स्वरूप से जोड़ा जाता है।

इस पूजा का संबंध विजय, शक्ति और आशीर्वाद की कामना से है। इसके समय और विधि के लिए स्थानीय पंचांग तथा पारिवारिक परंपरा का पालन करना चाहिए।

दशहरा पर रावण दहन क्यों किया जाता है?

रावण दहन उत्तर भारत में दशहरा का एक प्रमुख आकर्षण है। इस अवसर पर बड़े मैदानों में रावण के पुतले जलाए जाते हैं। कई स्थानों पर कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन भी किया जाता है।

आमतौर पर रावण दहन से पहले रामलीला का आयोजन होता है, जिसमें भगवान श्रीराम और रावण के अंतिम युद्ध का मंचन किया जाता है। इसके बाद लोग परिवार के साथ उत्सव देखने के लिए एकत्रित होते हैं।

प्रतीकात्मक रूप से रावण दहन बुराई के अंत और धर्म की विजय का संदेश देता है। इसकी व्याख्या अलग-अलग हो सकती है, लेकिन इसका मुख्य भाव सत्य, जिम्मेदारी और सदाचार से जुड़ा है।

भारत के सभी क्षेत्रों में रावण दहन की परंपरा समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों में दुर्गा पूजा, मंदिरों के अनुष्ठान और धार्मिक शोभायात्राओं का विशेष महत्व होता है।

भारत में दशहरा कैसे मनाया जाता है?

उत्तर भारत

उत्तर भारत के कई शहरों में रामलीला, मंदिरों में पूजा और रावण दहन दशहरा के प्रमुख आयोजन हैं। सार्वजनिक मैदानों में बड़ी संख्या में लोग इन कार्यक्रमों को देखने आते हैं।

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में विजयादशमी दुर्गा पूजा के समापन का महत्वपूर्ण दिन है। भक्त मां दुर्गा की विदाई से जुड़े अनुष्ठान करते हैं। कई स्थानों पर प्रतिमाओं के विसर्जन से जुड़ी शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं।

वर्ष 2026 में बंगाल की विजयादशमी बुधवार, 21 अक्टूबर को है।

मैसूर, कर्नाटक

मैसूर का दशहरा राजसी परंपराओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रसिद्ध जम्बू सवारी के लिए जाना जाता है। यह उत्सव मां चामुंडेश्वरी की महिषासुर पर विजय से जुड़ा है।

मैसूर दशहरा की आधिकारिक कार्यक्रम-सूची के अनुसार, जम्बू सवारी 21 अक्टूबर 2026 को आयोजित होगी।

भारत की अन्य क्षेत्रीय परंपराएं

भारत के कुछ क्षेत्रों में विजयादशमी के दिन नई शिक्षा आरंभ करने, औजारों और वाहनों की पूजा करने या नए काम की शुरुआत से पहले आशीर्वाद लेने की परंपरा है। दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में आयुध पूजा का विशेष महत्व है।

इन अलग-अलग रीति-रिवाजों से पता चलता है कि विजयादशमी भारत की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को एक साथ जोड़ती है।

दशहरा 2026: 20 अक्टूबर या 21 अक्टूबर, सही तिथि क्या है?

दोनों तारीखें अलग-अलग पंचांगों और क्षेत्रीय परंपराओं के कारण दिखाई देती हैं।

दिल्ली के लिए द्रिक पंचांग 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी बताता है, जबकि दशमी तिथि 21 अक्टूबर तक रहती है। बंगाल की विजयादशमी 21 अक्टूबर को है। मैसूर के आधिकारिक कार्यक्रम में भी प्रसिद्ध जम्बू सवारी 21 अक्टूबर को निर्धारित है।

इसलिए पर्व की सही तिथि उसके क्षेत्रीय स्वरूप और स्थानीय पंचांग पर निर्भर करती है। घर पर पूजा करने के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. वर्ष 2026 में दशहरा कब है?

दिल्ली और उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में विजयादशमी 21 अक्टूबर को है।

2. दिल्ली में दशहरा 2026 का विजय मुहूर्त क्या है?

दिल्ली में विजय मुहूर्त 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक बताया गया है। पूजा से पहले स्थानीय समय की पुष्टि करें।

3. रावण दहन क्यों किया जाता है?

रामायण की परंपरा के अनुसार रावण दहन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय की स्मृति में किया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

4. विजयादशमी मां दुर्गा से कैसे जुड़ी है?

मां दुर्गा की धार्मिक परंपरा में विजयादशमी महिषासुर पर देवी की विजय और धर्म की स्थापना का प्रतीक है।

5. दशहरा पर शमी पूजा क्या है?

शमी पूजा एक पारंपरिक अनुष्ठान है, जिसमें शमी वृक्ष की पूजा की जाती है। कुछ परंपराओं में इसे विजय और शुभता से जोड़ा जाता है।

6. वर्ष 2026 में मैसूर की जम्बू सवारी कब होगी?

मैसूर दशहरा की आधिकारिक कार्यक्रम-सूची के अनुसार जम्बू सवारी बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को होगी।

निष्कर्ष

दशहरा विजय, साहस और सदाचार का उत्सव है। कोई भगवान श्रीराम की पूजा करता है, कोई मां दुर्गा की आराधना, तो कोई रामलीला, शमी पूजा या रावण दहन के माध्यम से इस पर्व को मनाता है।

विजयादशमी का संदेश केवल एक दिन के उत्सव तक सीमित नहीं है। यह हमें सत्य, विनम्रता, जिम्मेदारी और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं! जय श्रीराम! जय माता दी!

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